मुन्नी कामत
एकांकी
पात-पातसँ
बनल परिवार
प्रथम-दृश्य-
(बड़की भौजी असगरे
तामशसँ लाले-लाल अछि, जेना लगैत अछि जे ओकरा देह मे आ बोलमे कोइ लुंगिया मेरचाय
रगड़ि देने हुअए।)
बड़की भौजी- उंउ कइर-झुमरि, कइर-लुठबी
बुझै कि छै अपनाकेँ? हमरासँ मुँह लगाओत। नमहर छोटक लिहाज नै, बाप रो बाप मुँहमे मेचो नै परै छै बजैत कला। आय अबए दै छिऐ टुनमा बाबूकेँ, कहबै नै बनत हमरा एे मोगिया संगे हमरा भीन करि दिअए।
(शंकर कअ प्रवेश)
शंकर- टुनमा माए, हे यैयय
टुनमा माए, कि भेल? एना किआ तिलमिला रहल छी! असगरे केकरा संगे बात करै छिऐ।
बड़की भौजी- ओइ ऊपरबला सँ, जे नमहर बना
कऽ तँ पठेलक ऐ घरमे पर भैलू कुत्तो जकाँ नै यऽ। आब तँ छोटकीकेँ बोल फुटए लगलैए। अपन
बेज्जति करबैसँ नीक यऽ कि पहिले सर्तक भऽ जाइ। हम भीन हइ लऽ चाहै छी।
शंकर- धुर्रर, बताह भेलिऐ कि!
लोग कि कहत चुप रहू। चलु हम हाथ-पएर धोने अबै छी जल्दि खेनाइ लगाउ बड़ जोड़ भुख लगल
अछि आ अहूँ कनी संगे खा लिअ तामश हटि जएत।
(पटाक्षेप।)
दोसर-दृश्य-
पंकज- छोटकी कि भेलै यइ? आय भौजी
पुरे घरकेँ अपना माथपर उठेने छै।
छोटकी- अहाँकेँ भौजी बेसी बलगर
अछि तइ खातिर छोट-मोट बातपर हंगामा खड़ा केने रहैए। असल बात तँ ई छै कि दुनू पावर
मिलल छै ने, साउसोकेँ आ जेठानियोकेँ तँइ मति छिन्नु भऽ गेल छै।
पंकज- (तमसा कऽ कहै।) अहाँकेँ
बजैक तमीज नै अछि। अहाँ अपन माइयो संगे अहिना बजैत रहिऐ आकि अतए सठियेलियइ हेँ। ठीके
भौजी कहै छै अहाँकेँ जुवान नै रेती छी रेती। खब्बरदार जे हमरा माए सनक भौजीक विरूध
एको गो अनरगल शब्द बजलौं तँ जीह घीचि लेब। धनि ई भौजी जे हम जिंदा छी। बिनु माएक
तँ हम अनाथे भऽ गेल रही, यएह भौजी जे माए बनि हमरा सहारा देलक। आइ ओकर एगो बात अहाँकेँ
घोंटल नै जाइए।
छोटकी- हम छोट छी तँ अकर मतलब
कि बड़काकेँ एड़ी तर मसलैत रही। हम आगू भऽ कऽ लड़ैले नै जाइ छी, मुदा एगो
बात बूझि लिअ कोइ आगु भऽ कऽ जे हमरा बात कहत तँ पाछु सँ हम छोड़ब नै। नमहर लोककेँ
अपन बेवहारसँ छोटक आगु नमहर भऽ कऽ रहए पड़ै छै तबे उ नमहर कहाइ छै।
(दूरेसँ शंकरक अवाज
सुनाइत अछि)
शंकर- बौआ पंकज हौ कथीकेँ बहस
करै छहक दुनू गोरे। आबा घरसँ बाहर आबह। जेना छोट बच्चा लड़ाइ-झगड़ा कऽ फेर एक्केठीम
आ ओकरे संगे हसए-खलए लगैत अछि तहिना एकरा दुनूकेँ झगरा छै। तूँ आब एना बात नै बढ़ाबह।
पंकज- अबै छी भैया।
(पटाक्षेप।)
तेसर दृश्य-
(3-4टा बच्चाक संगे
पायल आ काजल घरक बाहर खेलाइत अछि। खेल-खेलमे दुनू बहिन आपसमे लड़ए लगैए, तखने बड़की
भौजी बच्चाकेँ चिख-पुकार सुनि घरसँ बाहर अबैए आ एक थप्पर अपन बेटी पायलकेँ आ एक
थप्पर छोटकीकेँ बेटी-काजलकेँ मारैत अछि।
(थप्पर लगैत पाँच सालक काजल
मुँह भरे खसि पड़ैत अछि। तखने छोटकीयो दौगल अबैए।)
छोटकी- बाप रे बाप, मारि देलक
हमरा बेटीकेँ। मुँहसँ खुन बोकड़ैत अछि। कोइ दौगू डॉक्टरकेँ बजेने आउ। काजल... बेटी
काजल....!
(जहिना छोटकी काजलकेँ
कोरामे उठाबैत अछि सभ अबाक् रहि जाइत अछि। काजलकेँ मुँहसँ खुनक पमारा निकलैत अछि।
काजल मुर्छित भऽ जाइत अछि। बड़की भौजी दौग कऽ एक लोटा पानि अनैए आ काजलक मुँह पर
पानि छिटैए।)
बड़की भौजी- बुच्ची काजल, बाबू कि भेल आँखि खोलू।
छोटकी- ई मगरमछक नोर लऽ कऽ सहानुभूति
देखबै लऽ अतए नै आउ। हमरा बेटीकेँ ऐ अवस्थामे पहुँचा कऽ आब हमदर्दी देखबै छी! अगर
अहाँ एक बापक बेटी छी तँ हमरा नजरिसँ दूर भऽ जाउ। हम अहाँक मुँह देखए नै चाहै छी।
(बड़की भौजी कनैत घर चलि
जाइत अछि। पंकज डॉक्टरकेँ संगे दौगैत अबैत अछि।)
डॉक्टर- (काजलकेँ देखि ओकर
खुन सब पोछैत) चिंताक कोनो बात नै छै, अगुलका दाँत ठोरमे कनियेँ गरि गेल रहै आ छोट
बच्चा छै तँइ मुर्छित भऽ गेलै। हम किछु दवाइ लिखि दै छी। मंगबा लिअ तीन दिनक खोराक
अछि आ घबरा नै किच्छो नै भेलै। बच्चाकेँ अहिना छोट-मोट चोट लगिते रहै छै।
पंकज- चलु डॉक्टर सहाएब, हम अहाँकेँ छोड़ि अबै
छी।
(पटाक्षेप।)
चारिम दृश्य-
(बड़की भौजी आ शंकर दुनूक बीच
ऐ प्रसंग पर चर्चा होइत अछि।)
शंकर- पायल माए, अहाँ ई ठीक नै केलौं। घरक झगड़ाकेँ
तामशसँ अहाँ छोट बच्चापर निकालि लेलौं।
बड़की भौजी- छोटकी आ बौआ तँ यएह
सोचै छै कम-सँ-कम अहाँ तँ हमरा समझू, हम तँ झगड़ा छोड़बै खातिर दुनूकेँ कनिकबे जोरसँ
मारलिऐ, हमरा कपारमे दोष लिखल छेलै तँइ ई घटना घटलै।
छोटकी- घटना घटलै कि घटना घटेलिऐ। हमरासँ लड़ि
कऽ मन नै शांत भेल तँ हमरा बच्चोकेँ नै छोड़लौं।
(पंकज दिश ताकैत) सुनै
छिऐ आय अखने भीन होउ नै तँ हम अपना देहपर मटिया तेल छीट कऽ आगि लगा लेब।
पंकज- अच्छा शान्त रहू, हमहुँ नै आब
जड़िमे रहब। ऐ खुनक खेल खेलाइ सँ तँ नीक रहत जे अलगे रहू मुदा शांतिसँ रहू।
शंकर- बौआ कि बजै छहक तूँ। एकरा
सभकेँ बातमे आबि कऽ तुहों अहिना बजए लगलहक। खबरदार जे फेरसँ भीनक नाओं लेलहक।
पंकज- भैया, ई हमर आखिरी फेसला छी। आब हम जड़मे
नै रहब।
शंकर- बौआ, लोक कि कहतह, एना नै करह।
जल्दिबाजीमे कोनो फेसला नै करल जाइ छै।
पंकज- हमरा लोकक परबाह नै छै अगर
परवाह छै तँ अपन बच्चा आ परिवारक। जखनि हमर बच्चा लहु-लोहान छल तखनियेँ हमर मन
तोरासँ भीन भऽ गेलौ।
(सभ मुँह लटका
अपना-अपना कमरामे चलि जाइत अछि।)
(पटाक्षेप।)
अंतिम दृश्य-
(घरक सभ सदस एक संगे एकट्ठा
होइत अछि।)
राधेश्याम- बौआ पंकज, कि भेलै जे बात भीन-भिनाओज पर चलि
एलै।
पंकज- बाबु हम कोनो तर्क-वितर्क करैले नै चाहै छी, हमरा जड़मे
नै बनैए तँइ हम भीन हएब।
राधेश्याम- छोट-मोट बातपर घबड़ेनाइ आ जिनगीक संघर्षसँ
मुकरनाइ ई इंसानक काज नै भगोराक काज छी।
पंकज- बाबू, आय हमर बेटीकेँ ई
हाल भेल काल्हि किछु और हएत। अतेक दिनसँ काजलक माए संगे होइत रहै तँ हम किछो नै
कहैत रहिऐ, आब हमरा बच्चा संगे करए लागल अखनो जे हम किछो नै बजब तँ कहीं काल्हि
अंजाम ईहोसँ बूड़ा नै हुअए।
राधेश्याम- बौआ, काजल संगे जे भेलै
उ संयोग मात्र रहै। एनाहियो तँ भऽ सकैए कि काल्हि आइयोसँ नीक होय। बौआ भिन्न भेनेसँ
खाली अंगना नै मनो बटाइत अछि। सम्मलित परिवार एक शरीर जकाँ होइत अछि। जेना शरीरक
कोनो अंगमे एगो काँट गड़ैसँ ओकर दरदक लहरि पुरे शरीरमे दौगैत अछि तहिना सम्मलित
परिवारमे कोनो एक व्यक्तिकेँ किछो हो छै तँ ओकर दरदक एहसास पुरे परिवारक हर सदस्यकेँ
होय छै। असगर रहनेसँ इंसान स्वार्थी भऽ जाइत अछि। जेना शरीरक कोनो अंगमे घाव भऽ गेलापर
ओकरा काटि कऽ अलग करि कऽ बजैए मलहम लगा कऽ ठीक करल जाइत अछि, तहिना
परिवारक बीच बरहल मन-मोटओकेँ प्यारक मलहमसँ आ आपसी समझौतासँ दूर करैत अछि। आय बड़की
कनियाँकेँ एक थप्पर तोरा नजरि एलह आ ओकर अतेक सालक दुलार बिसरि गेलहक। जे भौजी
माए बनि हरिदम तोरा आगु ठाढ़ रहह उ अगर तोरा बेटीकेँ एक थप्पर माइरे देलकह तँ कि
गुनाह केलकह।
छोटकी कनियाँ हमर
एगो बात सुनह, सासुरमे सासु माएक रूप आ दियादिनी बहिनक रूप होइत अछि। अोकरा जाबे तक जिनगीमे
उतारबहक नै घर स्वर्ग नै बनतह बस मकान बनि कऽ रहि जेतह। जतए रहै आ खाइक सुविधा
होय छै और किछो नै।
(सब एक संगे हाथ जोड़ि कऽ)
बाबु हमरा सभकेँ माफ
करि दिअ, हम सभकेँ सभ गुनेहगार छी। जँए अहाँकेँ मन दुखेलौं। हम आपसमे कहियो नै लड़ब
ने कहियो भीन हएब।
(पटाक्षेप।)
इति।
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