Monday, March 18, 2013

सतमाए :: जगदीश प्रसाद मण्‍डल


                जगदीश प्रसाद मण्‍डल :: सतमाए एकांकी 
पहि‍ल दृश्‍य-


वि‍द्यालय। समए माघक ३ बजे। स्‍कूलक अग्‍नेय (आंगन)मे बुद्धि‍धारीबाबू (प्रधानाचार्य) वि‍पति‍‍बाबू (सहयोगी शि‍क्षक) कुरसीपर आ पुलकि‍त (चपरासी) स्‍टूलपर बगलमे बैस गप-सप्‍प करैत।

बुद्धि‍धारीबाबू-          आब वि‍द्यालयमे नै मोन लगैए। होइए जे कखन रि‍टायर भऽ जाइ। कखनो कऽ तँ एहनो भऽ जाइए जे भोलेनट्री रि‍टायरमेंट लऽ ली।
पुलकि‍त-            से कि‍अए मासैब?

बुद्धि‍धारी-            तोहूँ तँ पनरह-बीस बर्खसँ संगे रहि‍ते छह देखते छहक जे की मान-प्रति‍ष्‍ठा स्‍कूलोक आ शि‍क्षकोक छल आ अखैन की अछि‍।
पुलकि‍त-            ऐ जुगमे मान-प्रति‍ष्‍ठा लऽ कऽ धो-धो चाटब। भने दि‍न-राति‍ दरमाहा बढ़बे करैए, सुखसँ जीबू।
बुद्धि‍धारी-            (कनडेरि‍ये आँखि‍ये पुलकि‍त दि‍स देख) तूँ जे सवाल उठेलह पुलकि‍त, ओ बड़-भारी अछि‍। मुदा प्रश्न तोहर छि‍अह तँए जबाब देब उचि‍त भऽ गेल।
                  (जि‍ज्ञासासँ वि‍पति‍बाबू बुद्धि‍धारीबाबूक नजरि‍पर आँखि‍ गाड़ि‍ मोनकेँ असथि‍र कऽ सुनैक बाट तकै छथि‍.)

पुलकि‍त-            मासैब, जहि‍ना खेतक आड़ि‍-धूड़ बाढ़ि‍क बेगमे बि‍‍गड़ि‍ जाइत तहि‍ना भऽ गेल अछि‍।
                  (पुलकि‍तक दोहराओल प्रश्नसँ बुद्धि‍धारीबाबूक मोन आरो अमता गेलनि‍। मुदा धैर्यसँ शक्‍ति‍ जगबैत)
बुद्धि‍धारी-            पुलकि‍त, जते सुख आ चैनसँ जीबए चाहैत छी ओते दुख आ बेचैनी बढ़ल जाइए। तोंही कहह जे बि‍ना काजक बोइन जे भेटतह ओ अन्न देहमे लगतह।
पुलकि‍त-            (धड़फड़ा कऽ) से केना लगत। काजमे जते देह दुहाइत अछि‍ ओते भूख जगै छै जते भूख जगै छै ओते अधि‍क अन्न पचै छै। देह थकबे ने करत तँ भूख कन्ना जागत। जँ भूख नै जागत तँ खाइक क्षुधा कन्ना हएत? जेहेन खाइ अन्न तेहेन बने मोन, जेहेन बने मोन, जते जगे अर्पण।
बुद्धि‍धारी-            अपने वि‍द्यालयक खि‍स्‍सा कहै छि‍अए। जइ दि‍नमे एलौं ओइ दि‍नमे एगारह गोटे शि‍क्षक रही आ चारू कि‍लास मि‍ला कऽ साढ़े चारि‍ साए वि‍द्यार्थी रहए। साइंस, कौमर्स आ आर्ट तीनू फेक्‍लटी रहए।
पुलकि‍त-            चपरासी कतेक रहए?

बुद्धि‍धारी-            (मुस्‍की दैत) एक्केटा। काजो कम रहए। अच्‍छा सुनह। सभ कि‍लासमे सेक्‍शन चलैत रहए। अखैन देखहक जे रजि‍ष्‍टरमे छओ सौ वि‍द्यार्थी आ सतरह गोटे शि‍क्षक छी।
पुलकि‍त-            हँ, से तँ छी।
बुद्धि‍धारी-            मुदा की देखै छहक जे आइ मात्र चर्तुदसी छी, ने शि‍क्षक ऐलाह आ ने छात्र।
पुलकि‍त-            छुट्टी दरखास आएल की नै?

बुद्धि‍धारी-            एक्कोटा नै।
पुलकि‍त-            मासैब, ऐ बुढ़ाड़ीमे कते माथा-पच्‍ची करब। भरमे-सरम अपन जि‍नगी आ परि‍वारकेँ देखि‍यौ।
बुद्धि‍धारी-            से उचि‍त हएत?

पुलकि‍त-            रूइया जकाँ जे माथ धुनि‍-धुनि‍ उड़ेबे करब तइसँ सीरक कन्ना बनत?

                  (वि‍पति‍बाबूपर नजरि‍ दैत)
बुद्धि‍धारी-            एते दि‍न तँ नै कहलौं वि‍पति‍बाबू कि‍एक तँ साल नै लागल छल मुदा आब तँ सालसँ ऊपर भऽ गेल। एकटा बात पुछू?

वि‍पति‍बाबू-            एकटा कि‍अए हजारटा पुछि‍ सकै छी। जखैन सभ दि‍न एकठाम रहै छी, एक पेशा अछि‍, तखन पुछैक लेल आदेशक की प्रयोजन?

बुद्धि‍धारी-            अहाँ बि‍‍आह कऽ लि‍अ?

वि‍पति‍बाबू-            यएह जे दूटा बेटो-बेटी अछि‍।

बुद्धि‍धारी-            मानै छी। मुदा ई कहू जे बेटा-बेटीक उम्र कते अछि‍?

वि‍पतिबाबू‍-            अपने वि‍द्यालयमे बेटा एगाढ़मामे पढ़ैत अछि‍ आ बेटी नाइन्‍थमे।
बुद्धि‍धारी-            (आंगुरपर हि‍साब जोड़ि‍) चौदह-पनरह बर्खक बेटा आ बारह-तेहर बर्खक बेटी हएत?

वि‍पति‍बाबू-            करीब-करीब।
बुद्धि‍धारी-            पान-सात बर्खमे बेटी सासुर चलि‍ जाएत। जे हवा बनि‍ रहल अछि‍ ओइमे जँ बेटाकेँ इंजीनि‍यर वा एम.बी.ए. नै कराएब सेहो नै बनत।
वि‍पति‍बाबू-            जँ से नै कराएब तँ हँसारते हएत। तइपर सँ इहो दोख लागत जे माए मरि‍ते बेटा-बेटीकेँ वि‍पति‍ कुभेला करै छै।
बुद्धि‍धारी-            (कि‍छु सोचैत) कहलौं तँ ठीके। मुदा जँ अपना काजमे कमी नै आनब तँ लोक बाजत कि‍अए। कहुना तँ पच्‍चीस-तीस हजार महि‍ना उठैबते छी। असानीसँ सभ काज चला सकै छी।

वि‍पति‍बाबू-            (मुड़ी डोलबैत) एक तरहक वि‍चार अछि‍।
बुद्धि‍धारी-            (नमहर साँस छोड़ैत) ई भार हमरा ऊपर रहल। जहि‍ना एक-एक समस्‍या डोरीक सूत जकाँ बाँटल अछि‍ तहि‍ना ओकरा खोलि‍ कऽ उघारि‍-उघारि‍ सोझराबए पड़त।
पुलकि‍त-            (फड़कि‍ कऽ) मासैब, कँटहो बाँस तँ लोके काटि‍ कऽ घरमे लगबैए आ ई कोन ओझरी छि‍ऐ।
बुद्धि‍धारी-            एक आदमीक समस्‍या (ओझरी) कतेकोकेँ ओझरबैत अछि‍। तँए अौगता कऽ कि‍छु बाजि‍ देब वा करैले डेग उठा देब, अनुचि‍त हएत। (घड़ी देख कऽ) सवा तीन बजि‍ये गेल। काजो नहि‍ये जकाँ अछि‍। चाभी लऽ कऽ क्‍लासोक कोठरी आ आॅफि‍सो बन्न कऽ दहक।
                 
                  (पुलकि‍त चाभीले बढ़ए लगल। दुनू गोटे कुरसीपर सँ उठि‍ गेलाह। दुनू कुरसि‍यो आ स्‍टूलो आॅफि‍समे रखि‍ कोठरी बन्न कऽ पुलकि‍त अबैत अछि‍।)
बुद्धि‍धारी-            वि‍पति‍बाबू, अहाँक जि‍नगी देख मोनमे उदि‍ग्‍नता उठि‍ रहल अछि‍।
वि‍पति‍बाबू-            कि‍अए?

बुद्धि‍धारी-            अपना सभ समाजक उच्‍च श्रेणीक रहि‍तो जि‍नगी आ मनुखक रहस्‍य नै बूझि‍ रहल छी। जे सहजे नि‍म्न श्रेणीक (बौद्धि‍क) छथि‍ ओ केना बुझत। जँ से नै बुझत तँ अमती काँट जकाँ ओझरी (जि‍नगीक) केना छोड़ा पाओत?

वि‍पति‍बाबू-            (मुड़ी डोलबैत) बड़ गंभीर बात कहलौं।

बुद्धि‍धारी-            सदैत इच्‍छा रहैए जे सबहक परि‍वार नीक जकाँ फड़ै-फुलाइ मुदा से कहाँ भऽ पबैए। जहि‍ना आगू बढ़ल चि‍न्‍ता ग्रस्‍त (दुखी) तहि‍ना पछुआएल। आखि‍र एना होइ कि‍अए छै?

पुलकि‍त-            मासैब, अनेरे मोन भरि‍ओने छी। हँसि‍-खेल जि‍नगी गुदस कऽ ली सभसँ नीक।

                  (पुलकि‍तक बात बुद्धि‍धारीक करेजकेँ आरो बेध देलकनि‍। मुदा कोढ़मे चोट लगने असीम दरदो होइत तँ मुँहसँ हसि‍यो फुटैत।)

बुद्धि‍धारी-            (मुस्‍की दैत) पुलकि‍त, औझका दरमाहा तँ फोकटेमे भेल कि‍ ने?

पुलकि‍त-            फोकटमे कन्ना भेल। भरि‍ दि‍न बरदाएल जे रहलौं।
बुद्धि‍धारी-            अच्‍छा चलह संगे, तोरे ऐठाम चाह पीब।
पुलकि‍त-            दुआर पर तँ नहि‍ये पीयाएब दोकानमे जरूर पीया देब।
बुद्धि‍धारी-            से कि‍अए?

पुलकि‍त-            घरवारी व्रत केने छथि‍। ओ तँ अनेरे पेटकान लधने हेती। तइपर चाह बनबए कहबनि‍। बाढ़नि‍ सूप छोड़ि‍ आरो कि‍छु भेटत।
बुद्धि‍धारी-            तखन तँ तोहर घरवाली बड़ धर्मात्‍मा छथुन?

पुलकि‍त-            सोलहन्नी। बि‍ना धरमत्‍मेक भरि‍ दिन खटै छी आ दरमाहा हुनका हाथ पड़ै छन्‍हि‍।
बुद्धि‍धारी-            धर्मो कते रंगक होइए?

पुलकि‍त-            मासैब, अहीं मुँहे ने सुनने छी, जते रंगक लोक तते रंगक धरम। कि‍यो कोदारि‍ पाड़ि‍ पसि‍ना चुबा धरम-करम (धर्म-कर्म) बुझैए, तँ कि‍यो बम-गोली लऽ धर्म-कर्म बुझैए। कर्म तँ दुनू करैए।
(())


दोसर दृश्‍य-
                  वि‍पति‍बाबूक दरबज्‍जा। सुलक्षणी माए आ शि‍व कुमार (वि‍पति‍बाबूक बेटा) दरबज्‍जापर बैसल।‍
                  (बुद्धि‍धारी, वि‍पति‍बाबू आ पुलकि‍तक प्रवेश। सुलक्षणीकेँ गोड़ लगैत बुद्धि‍धारी। उठि‍ कऽ ठाढ़ होइत सुलक्षणी कुरसीकेँ आँचरसँ झाड़ैत।)
सुलक्षणी-            ऐपर बैसू। (बुद्धि‍धारीकेँ बैसते‍) बाल-बच्‍चा सभ आनन्‍दसँ छथि‍ कि‍ ने?

बुद्धि‍धारी-            भगवानक कृपासँ सभ आनन्‍दि‍त अछि‍।
सुलक्षणी-            भगवान नीक करथि‍। एहि‍ना सभ दि‍न परि‍वार फुलाइत-फड़ैत रहए।
बुद्धि‍धारी-            एकटा वि‍चार लेल एलौं?

सुलक्षणी-            हम कोन जोकरक छी जे अहाँकेँ वि‍चार देब। तखन तँ जे बुझै छी सएह ने कहब।
बुद्धि‍धारी-            वि‍पति‍बाबूकेँ बड़ कष्‍ट होइ छन्‍हि‍। तँए वि‍चार भेल जे ओ दोसर बि‍‍आह कऽ लथि‍।
सुलक्षणी-            (कने काल चुप रहि‍) जहि‍ना बेटा वि‍पति‍ अछि‍ तहि‍ना अहूँकेँ बुझै छी बौआ। तँए बजैमे धड़ी-धोखा नै होइए। हमर आशा कते दि‍न? वृद्ध भेलौं, कखन छी कखन नै, तेकर कोनो ठेकान नै अछि‍।

बुद्धि‍धारी-            तँए ने वि‍चार करबाक अछि‍।
सुलक्षणी-            दुनि‍याँमे ने सभ मनुख एक रंग अछि‍ आ ने  एक रंग चालि‍-चाढ़ि‍ छै। नीको छै अधलो छै। (कहि‍ चुप भऽ जाइत)

बुद्धि‍धारी-            अहाँक वि‍चार की अछि?

सुलक्षणी-            के अपन परि‍वारकेँ उजड़ैत-उपटैत देखए चाहत।
बुद्धि‍धारी-            अपन जे अखैन परि‍वार अछि‍, ओ केना लहलहाइत रहत अइले ने वि‍चारैक जरूरति‍ अछि‍?

सुलक्षणी-            वि‍पति‍ हमर बेटा छी आ शि‍वकुमार पोता छी। दुनू कन्ना नीक-नहाँति‍ जि‍नगी बि‍ताओत सएह ने मोनमे अछि‍। पोती तँ पाँच वर्खक बाद सासुर जाएत।

बुद्धि‍धारी-            (मुड़ी डोलबैत) हँ, कहलौं तँ नीके, मुदा.....?

सुलक्षणी-            मुदा की?

बुद्धि‍धारी-            मुदा यएह जे जहि‍ना पोखरि‍‍मे करहर-सौरखीक जनमौटी गाछक पात पकड़ि‍ ओरि‍या कऽ गाछ पकड़ि‍ जड़ि‍मे (ि‍नच्‍चामे) पहुँचि‍ उखाड़ल जाइत अछि‍ तहि‍ना केलासँ परि‍वारक कल्‍याण हएत।

सुलक्षणी-            बौआ, अहाँक बात नै बुझलौं?

बुद्धि‍धारी-            परि‍वारमे जते गोरे छी सबहक जि‍नगीक डोर पकड़ि‍-पकड़ि‍ ठढ़ धड़बऽ पड़त। तखने जा कऽ सुढ़ि‍ऐत‍।

सुलक्षणी-            (मुड़ी डोलबैत) कहलौं तँ ठीके मुदा समाजो तँ तेहेन अछि‍ जे नीक-अधला बात बाजि‍ मोनकेँ घोर कऽ दैत अछि‍। जइसँ लोकक वि‍चारमे धक्का लगै छै। (कहि‍ चुप भऽ जाइत)

                  (बीचे‍मे पुलकि‍त)

पुलकि‍त-            मासैब आ चाची, दुनू गोरेकेँ कहै छी। वि‍पति‍ भाय एकबतरि‍ये हेता।‍ हमर जे घरवाली मरल रहैत‍ तँ केकरोसँ पुछबो ने कैरति‍ऐ आ दोहरा कऽ बि‍‍आह कऽ नेने रहि‍तौं।
                  (पुलकि‍तक बात सुि‍न)

बुद्धि‍धारी-            (हँसैत) पुलकि‍त, परि‍वारक संग समाजोक वि‍चार करए पड़ै छै।

पुलकि‍त-            समाजकेँ अपने ठेकान नै छै। नीकोकेँ अधला कहैत अछि‍ आ अधलोकेँ नीक।

बुद्धि‍धारी-            हँ, से तँ अछि‍।
पुलकि‍त-            (अपना वि‍चारपर जोर दैत) मासैब, जे समाज केकरो घर नै बना सकैए ओकरा कोन अधि‍कार छै जे केकरो घर उजाड़ै।
बुद्धि‍धारी-            कहलह तँ ठीके मुदा धड़फड़मे कि‍छु करबो तँ सब नीके नै होइत अछि‍। अधलो भऽ सकैत अछि‍।

पुलकि‍त-            हँ, से तँ होइतो अछि‍।

बुद्धि‍धारी-            तँए ने वि‍चारक जरूरति‍ अछि‍। तूँ तँ वि‍पति‍बाबूक परेशानी देख धाँय दे बजलह। तोरह वि‍चार कटैबला नै छह।

पुलकि‍त-            एक बेर आरो चाह पीबू तखन मोन आरो खनहन हएत। जइसँ झब दे रस्‍ता भेटत।
                  (पुलकि‍तक बात सुनि‍)
वि‍पति‍बाबू-            बौआ (शि‍वकुमार) चाह बनौने आबह। पुलकि‍तक कपमे कनी बेसी कऽ चीनी देने अबि‍हह।
पुलकि‍त-            हम की आन दुआरे चाह पीबै छी मीठे दुआरे पीबै छी की। जावतो जीबै छी तावतो जँ हँसी-खुशीसँ नै जीयब तँ अनेरे जीबि‍ये कऽ की करब।
(चाह अबैत अछि‍ सभसँ पहि‍ने पुलकि‍तेक कप बढ़बैत अछि‍।)

बुद्धि‍धारी-            हमरो कपक चाह कनी पुलकि‍तमे ढारि‍ दहक।
पुलकि‍त-            ऍंह, मासैब केहेन गप बजै छी। अनकर हि‍स्‍सा खाएब से पचत।
बुद्धि‍धारी-            (हँसैत) हमरा आन बुझै छह?

पुलकि‍त-            नै मासैब, मुँहसँ नि‍कलि‍ गेल। अच्‍छा कनी ढारि‍ दि‍यौ।
                  (चाह पीब पान खा)
बुद्धि‍धारी-            चाची, वि‍पति‍बाबू जँ दोसर बि‍‍आह करथि‍ तँ अहाँकेँ कोनो वि‍रोध नै ने?

सुलक्षणी-            नै। आब हमरा की चाही। वस एतबे ने जे पाँच कर भोजन आ पाँच हाथ वस्‍त्र भेटैत रहए।
बुद्धि‍धारी-            बाउ, शि‍वकुमार, अहाँ मोनमे की बनैक (पढ़ैक) वि‍चार अछि‍?

शि‍वकुमार-           अखैन तँ हाइये स्‍कूलमे छी। मुदा मोनमे अछि‍ जे चाहे इंजीनि‍यरि‍ंग वा एम.बी.ए. पढ़ी।
बुद्धि‍धारी-            बहुत बढ़ि‍या। मुदा जखैन इंजीनि‍यर वा एम.बी.ए. करबह तखन तँ नोकरी करए कारखाना वा शहर-बजार जेबह। परि‍वारो (पत्नी) जेथुन।
                  (शि‍वकुमार गुम भऽ जाइत अछि‍)

बुद्धि‍धारी-            चुप कि‍अए भेलह। बाजह।
शि‍वकुमार-           हँ।
बुद्धि‍धारी-            बात तोंही कहह जे दादी मरि‍ जेथुन, तों परि‍वारक संग शहर चलि‍ जेबह, बहि‍न सासुर चलि‍ जेतह, ऐठाम वि‍पति‍बाबूक दशा की हेतनि‍?

शि‍वकुमार-           मासैब, अहाँ बाबूक संगि‍येटा नै छि‍यनि‍‍, गुरुओ छी। अपने जे कहब शि‍रोधार्य अछि‍।
बुद्धि‍धारी-            वि‍पति‍बाबू, दुनि‍याँमे मनुख खराब नै होइत अछि‍। ओकरा बनबैमे नीक-अधला होइ छै। जइसँ नीक-अधला बनैत अछि‍।
पुलकि‍त-            हँ, से तँ होइ छै।
बुद्धि‍धारी-            माएक लेल बेटा-बेटीक लेल पि‍ता आ पत्नीक (वि‍वाहक बाद) लेल पति‍ बनि‍ आगूक जि‍नगी बना जीब। यएह अंति‍म बात अछि‍। पुलकि‍त एकटा कनि‍याँ ताकह।

(())


तेसर दृश्‍य-
                  तेतरी आ खजुरि‍या बि‍परीत दि‍शासँ अबैत बाटपर भेँट।

खजुि‍रया-            फुल कतऽ दौगल जाइ छी। पएरपर पएर नै पड़ैए?
तेतरी-              की कहब फुल, देखि‍यौ जे सूर्ज सि‍रपर आबि‍ गेल, अखैन तक भानस नै चढ़ैलौं। अपने (पति‍) नहाइले गेल हेता भानस चढ़ेबे ने केलौं।
खजुि‍रया-            कि‍अए ने अखैन तक भानस चढ़ेलौंहेँ?

तेतरी-              की पुछै छी फुल, (मुस्‍की दैत) रजकुमराकेँ देखि‍यौ जे पहि‍लुका (विआही) बहु छोड़ि‍ कऽ अबलट लगाकेँ चलि‍ गेल छेलै जे ऐहेन पुरुखसँ खनदान नै बढ़त। जखैन ओ (रजकुमरा) चुमौन कऽ लेलक तखैन फेर घुरि‍ कऽ अपने फुरने चलि‍ आएल।

खजुरि‍या-            चलि‍ एलै तँ राखि‍ लि‍अ। जहि‍ना अबलट लगा पड़ाएल जे ऐ पुरुखसँ खनदान नै बढ़तै तहि‍ना कमाएत-खाएत अपन रहत। जखैन रहेक मोन हेतै रहत जाइक मोन हेतै जाएत। तइले एते मत्‍था-पच्‍ची करबाक कोन जरूरति‍ छै?

तेतरी-              जेहने खेलाड़ि‍ मौगी छै तेहने रजकुमरा अपने अछि‍। हँसि‍-हँसि‍ बजैत रहैए तँए बुझै छि‍ऐ। नमरी अछि‍, नमरी।
खजुरि‍या-            ओइ पाछू अहाँक भानसक अबेर कि‍अए भऽ गेल। झगड़ा केकरो आ काज छुटि‍ गेल अहाँकेँ?

तेतरी-              नून आनए दोकान वि‍दा भेलौं आकि‍ हल्‍ला सुनलि‍ऐ, भेल जे केकरो कि‍छु भऽ गेलै। ससरि‍ कऽ गेलौं तँ यएह रमा-कठोला देखलि‍ऐ। ओही लटारममे लागि‍ गेलौं।
खजुरि‍या-            फेर भेलै की?

तेतरी-              की हेतै। मोन दुनूक लसि‍आएल बूझि‍ पड़ल। मुदा हारल तँ दुनू अछि‍। लाजे लोक लगमे की बाजत तँए दुनू अनकर मोन पति‍अबै छै। अखैन जाए दि‍अ फुल। नि‍चेनमे सब गप कहब।
खजुरि‍या-            भानस हेबे करतै मुदा अाधा गप कहि‍ कऽ छोड़ि‍ देलि‍ऐ। अखैनसँ पेटमे उनटैत-पुनटैत रहत। अनका पुरुख जकाँ की हि‍नकर पुरुष छन्‍हि‍ जे मुँह अलगौतनि‍?

तेतरी-              मुँह जे अलगौत से कोनो सपेत कऽ। कमा कऽ हाथमे आनि‍ दइ छथि‍ मुदा नूनसँ हरैद धरि‍ तँ हमरे जोरह पड़ैए। भरि‍ दि‍न दौगैत-दौगैत तबाह रहै छी।
खजुरि‍या-            एकटा गप सुनलि‍ऐहेँ?

तेतरी-              की? नै!

खजुरि‍या-            गाममे नै छेलखि‍न?

तेतरी-              गाममे की कोनो एक्केटा गप चलैए जे सभ एक्के गप सुनत? रंग-वि‍रंगक गप पुरवा-पछवा जकाँ सदि‍खन चैलते रहैए कि‍?

खजुरि‍या-            अखैन इहो अगुताएल छथि‍ आ हमरो काज सभ अछि‍। कखनो नि‍चेनमे दुनू फुल गप कऽ लेब।
तेतरी-              तोहुँ हद करै छह। आ जे बि‍सरि‍ जा?
खजुरि‍या-            एहनो गप वि‍सरल जाइए।
तेतरी-              हँ, तँ वि‍सरल जाइए कि? आ जे अहूसँ नि‍म्‍मन गप आबि‍ जाए तँ हल्‍लुक गप लोक बि‍सरि‍ये जाइए कि‍ ने?

खजुरि‍या-            हँ, बेस कहलथि‍। मुदा खरि‍आइर कऽ नै कहबनि‍। उपरे-झापरे कहि‍ दइ छि‍यनि‍‍।
तेतरी-              हँ, सएह कहह।
खजुरि‍या-            पढ़ि‍-लि‍खि‍ कऽ तँ आरो लोक गाम घि‍नबैए।
तेतरी-              से की?

खजुरि‍या-            ऍंह, की कहबनि‍?

तेतरी-              नै-नै, कनी फरि‍या कऽ कहू।
खजुरि‍या-            बि‍पैत मासटर दोसर बि‍‍आह करताह?

तेतरी-              तँ ई कोन बड़-भारी बात भेल। वेचाराक स्‍त्री मरि‍ गेलनि‍ भानस-भातमे दि‍क्कत होइत हेतनि‍।
खजुि‍रया-            ऍंह, एहि‍ना बुझै छथि‍न।
तेतरी-              से की?

खजुि‍रया-            आइ जँ बेटा-बेटी नै रहि‍तनि‍ तखैन जँ करि‍तथि‍ तँ एकटा सोहनगर होइतै‍। जखैन बेटा-बेटी ढेरबा-जवान भेल तखैन कि‍अए करै छथि‍।
तेतरी-              (मुँह बन्न केने) हूँ।
खजुरि‍या-            हमरा काकाकेँ देखलखि‍न। बेचारेकेँ तँ एक्केटा बेटी भेलनि‍ आ काकी मरि‍ गेलनि‍। कतबो लोक हि‍ला-डोला कऽ रहि‍ गेल तैयो मानलखि‍न।
तेतरी-              हँ, से तँ बेस कहलौं।
तेतरी-              (कनी काल चुप रहि‍) हूँ...।

खजुरि‍या-            भानसो भातक दि‍क्कत की होइ छन्‍हि‍। अखैन हाथी सन माइयो छेबे करनि‍, बेटि‍यो भानस करै जोकर भइये गेलनि‍ तखैन कि‍अए करै छथि‍। पुरुखक कि‍रदानी बुझबै।
तेतरी-              अपने फुरने करै छथि‍ आकि‍ घरोक लोकक वि‍चार छन्‍हि‍?

खजुरि‍या-            ऍंए, हद करै छी। अहाँ नै देखै छि‍ऐ जे आबक बेटा-बेटी माए-बापसँ केहेन पुछै छै।
तेतरी-              से तँ ठीके कहै छी। मुदा सभ की एक्के-रंग होइए। हमरे घरबला छथि‍, मरैयौ बेर तक माइयेक कहलमे रहला। बेटो ने मनाही केलकनि‍।

खजुरि‍या-            बेटा की मनाही करतनि‍। चुमौन कऽ कऽ कनी घर आबए दि‍यौ तखैन ने हुर‍याहा देखबै। जहि‍ना बुढ़ीकेँ अतर-गुलाबसँ मालि‍श करतनि‍ तहि‍ना ने बेटो-बेटीकेँ टेमपर खाइले देतनि‍।
तेतरी-              सभ सतमाए की एक्के रंग होइए। ने सभ वियौहती नीके होइए आ ने सभ समदाही अधले होइए। पुरुखे की सभ एक्के रंग होइए?

खजुि‍रया-            हँ, से तँ बेस कहलौं। मुदा ओहि‍ना नै ने लोक बजैए।
तेतरी-              से बाजह। गामेमे सोनमाकेँ देखै छि‍ऐ। जहि‍यासँ समदाही एलै तहि‍यासँ घरमे लछमी आबि‍ गेलै। से तँ मनुख-मनुखपर छै।

खजुरि‍या-            मुदा नीके औतनि‍ तेकर कोन बि‍सवास?

तेतरी-              से तँ ठीके।
खजुि‍रया-            मुदा..?

तेतरी-              मुदा की? यएह ने जे जेहेन परि‍वारक लोक रहत तेहने ने नवका मनुख बनत।
खजुि‍रया-            ई की वि‍पति‍ मासटरकेँ बुझै छथि‍न?

तेतरी-              हम तँ नीके बुझै छि‍यनि‍‍।
खजुरि‍या-            घुइयाँ पुरुखक चालि‍ यएह बुझथि‍न। मुड़ी गोंति‍ कऽ चललासँ हेतनि‍। महकारी जकाँ पुरुख होइए। तरे-तर तना ने बि‍ठुआ काटि‍ लेतनि‍ जे बुझबे ने करथि‍न।
तेतरी-              जाए दि‍यौ नीक की अधला अपना परि‍वारमे हेतनि‍ तइसँ हमरा-हि‍नका की?

खजुि‍रया-            हमरा की? एना कि‍अए बजै छी। गाम की हमर नै छी जे जेकरा जे मोन फुड़तै से करत आ टुटुर-टुटुर देखैत रहब।
तेतरी-              अनकर झगड़ा मोल लेब।
खजुरि‍या-            कि‍अए ने लेब? झगड़ाक डर करब तँ एक्को दि‍न गाममे बास हएत।
तेतरी-              (आँखि‍ उठा कऽ ऊपर दि‍स देख) बड़ अबेर भऽ गेल। आइ बात-कथा सुनबे करब।
खजुरि‍या-            एकटा बात तँ कहबे ने केलियनि?

तेतरी-              की?

खजुरि‍या-            ढोरबा फेर चुमौन केलकहेँ।
तेतरी-              ओकरा तँ मारे धि‍यो-पुतो आ घरोवाली छइहे?

खजुरि‍या-            (वि‍हुँसैत) छठम छऐ।
तेतरी-              नि‍रलज्‍जा-नि‍रलज्‍जी सभ सभ उठा कऽ पीब नेने अछि‍। जहि‍ना पुरुखक धनमंडल अछि‍ तहि‍ना मौगीक। एकरा सभले रौदी-दाही अबि‍ते अछि‍।

(())


चारि‍म दृश्‍य-
                  (चि‍न्‍तामणि‍क दरबज्‍जा)
चि‍न्‍तामणि‍-           (स्‍वयं) हे भगवान अधमरू जि‍नगीमे कि‍अए फँसौने छी। अइसँ नीक जे मौगैत दि‍अ। आशाकेँ जते हृदेसँ लगबए चाहैत छी ओते ओ पि‍छड़ि‍-पि‍छड़ि‍ हटैत जाइए आ जि‍नगीकेँ अन्‍हार बनौने जाइए। अपनो भ्रम भेल जे आशा-नि‍राशा (अन्‍हार-इजोत) केँ शब्‍दकोषक शब्‍द मात्र बुझलि‍ऐ। मुदा आइ बूझि‍ रहल छी जे खाली शब्‍दकोषेक शब्‍द नै जि‍नगी छी। एते दि‍न माइयो बापक उत्तरी गरदनि‍मे लटकने घर-घराड़ी उपटैत छल मुदा आब तेसरो उत्तरी लटकए लगल। खैर, जे जि‍नगी देलह ओ तँ भोगबे करब। मुदा मरैयो बेर तक माछी जकाँ नाकपर नै बैसऽ देब। जाधरि‍ (जाबे आँखि‍ तकै छी तकै छी बन्न हएत-हएत)
                  (पुलकि‍तक प्रवेश)
चि‍न्‍तामणि‍-           अहाँ के छी, कि‍नकासँ काज अछि‍?
पुलकि‍त-            आदर्श स्‍कूलक चपरासी छी, बुद्धि‍धारीबाबू पठौलनि‍ अछि‍।

चि‍न्‍तामणि‍-           (आँखि‍ ऊपर उठबैत) के....। बुद्धि‍धारीबाबू। आदर्श स्‍कूलक शि‍क्षक। ओ तँ हमरा नै जनैत छथि‍, फेर.....।
पुलकि‍त-            पता चललनि‍ जे चि‍न्‍तामणि‍बाबूकेँ कन्‍या छन्‍हि‍। जँ ओ कन्‍याक बि‍‍आह वि‍पति‍बाबूक संग करए चाहथि‍ तँ....?

चि‍न्‍तामणि‍-           वि‍पति‍बाबू...।
पुलकि‍त-            हँ-हँ। ओहो सहयोगि‍एक रूपमे काज करै छथि‍।
चि‍न्‍तामणि‍-           ओ अवि‍वाहि‍ते छथि‍।
पुलकि‍त-            नै। पत्नी मरि‍ गेलखि‍न। दोहरा कऽ करताह।
चि‍न्‍तामणि‍-           (व्‍यग्र होइत) दोहरा कऽ करताह। सौतीनक तर तँ नै भेल। मुदा दोती बरसँ कुमारि‍ कन्‍याक ि‍वआह....। की अपन बेटीक भरि‍-भरि‍ दि‍नक उपासक पूजाक फल भगवान यएह देलखि‍न। मुदा उपाइये की? मृत्‍युकाल साधारण खढ़ोक आशा पाबि‍ चुट्टी धारक धारामे उगैत-डूमैत जान बचाइये लैत अछि‍। आशा भेट रहल अछि‍। बाउ, उमेर कते छन्‍हि‍?

पुलकि‍त-            हम दुनू गोरे एक बत्तरि‍ये छी। घरो एक्केठीन अछि‍।
(पुलकि‍तकेँ नि‍च्‍चासँ ऊपर माथ धरि‍ नि‍हारि‍-नि‍हारि‍ चि‍न्‍तामणि‍ देखै छथि‍)
चि‍न्‍तामणि‍-           बालो-बच्‍चा छन्‍हि‍?

पुलकि‍त-            हँ। एकटा बेटा एकटा बेटी छन्‍हि‍।
चि‍न्‍तामणि‍-           तखन दोहरा कऽ कि‍अए बि‍‍आह करताह?

पुलकि‍त-            माए बूढ़े छन्‍हि‍, बि‍‍आहक बाद बेटी सासुरे बसए लगतनि‍। नँउऐ-कौंउएे कऽ बचलनि‍ बेटा। बेटो सभ तेहेन ढाठी धऽ लेलक जे ओइसँ नीक बेटि‍ये। जे कमसँ कम पावनि‍-ति‍हारमे नै सनेस तँ वेनो पठेबे करैए। तँए जुगक अनुकूल अपन-अपन आशा बना जि‍नगी चलबैत रही।

चि‍न्‍तामणि‍-           नीक-नहाँति‍ अहाँक बात नै बुझलौं?

पुलकि‍त-            अपने पढ़ल-लि‍खल नै छी मुदा संगत पाबि‍ कि‍छु बुझल अछि‍। आगू बढ़ैक हाेड़मे समाज बि‍खंडि‍त भऽ रहल अछि‍ जइसँ गामक दशा दि‍नानुदि‍न गि‍रले जा रहल अछि‍।
चि‍न्‍तामणि‍-           (मुड़ी डोलबैत) हँ, से तँ भाइये रहल अछि‍।
पुलकि‍त-            अहीं कहू जे कि‍सान परि‍वारमे जन्‍म लेनि‍हार कि‍सान बनैत छलाह। पूर्वजक लगौल फुलवाड़ीकेँ कोर-कमठौनक संग पानि‍ ढारैत छलाह जइसँ समाजक हरीयरी बढ़ैत रहल। मुदा कल-कारखाना दि‍स घुसकि‍ समाजक (गामक) घर खसा रहल अछि‍। एहेन स्‍थि‍ति‍मे की कएल जाए।
चि‍न्‍तामणि‍-           बाउ, अहाँ चपरासी छी?

पुलकि‍त-            हँ। मुदा वि‍पति‍बाबूक लंगोटि‍या संगी सेहो छी। हमर माए-बाप गरीब छलाह, नै पढ़ौलनि‍। ओ (वि‍पति‍बाबू) बी.ए. पास कऽ कऽ हाइ स्‍कूलमे शि‍क्षक बनलाह। मुदा बच्‍चेसँ जहि‍ना रहलौं तहि‍ना अखनो छी।

चि‍न्‍तामणि‍-           बेटा नै बेटी छी तँए जि‍नगीक प्रश्न अछि‍। ओना वि‍अाह लेल डेग उठबैमे ने कोनो बाधा अछि‍ आ ने संकोच। मुदा जते अधि‍कार हमरा अछि‍ तइसँ मि‍सि‍यो कम माएकेँ नै छन्‍हि‍। तँए डेग उठबैसँ पहि‍ने हुनको पूछि‍ लेब जरूरी अछि‍। (जोरसँ) कतऽ छी कनी सुनि‍ लि‍अ?
                 
                  (सावि‍त्रीक प्रवेश)

सावि‍त्री-             की कहलौं?

चि‍न्‍तामणि‍-           (मुस्‍कुराइत) तीन सालक चि‍न्‍ता हेट भऽ रहल अछि‍।
सावि‍त्री-             (वि‍हुँसैत) से की? से की?

चि‍न्‍तामणि‍-           गीताक बि‍‍आहक सूहकार आएल अछि‍। कने बुझने-सुझने अबै छी। जँ कि‍छु धएल-धड़ल वि‍चार हुअए तँ अखने कहि‍ ि‍दअ।
सावि‍त्री-             राखल जोगाएल वि‍चार की रहत। पेटीमे राखल पुरान साड़ी जकाँ तरेतर सभ गुमसरि‍ गेल। पहि‍रै जोकर नै रहल। मुदा तैयो तँ कहबे करब जे नोर बहबैत बेटी सरापे नै।
चि‍न्‍तामणि‍-           अहाँ अर्द्धांगि‍नी छी जेकर आड़ि‍पर बेटा-बेटीक गाछ होइ छै। कोनो बात (वि‍चार) जोर दऽ कऽ हँ नै कहाएब। अखैन समए अछि‍ तँए मोनसँ वि‍चार देब तखने डेग उठाएब।
सावि‍त्री-             बरक वि‍षएमे कि‍छु कहि‍ दि‍अ?

पुलकि‍त-            शरीरसँ पूर्ण स्‍वस्‍थ, हाइ स्‍कूलमे शि‍क्षक छथि‍। धतपत तीस-पेंइतीसक अवस्‍था हेतनि‍। पहि‍ल कनि‍याँ पछि‍ला साल मरि‍ गेलनि‍। तँए परि‍वारक लेल दोहरा कऽ बि‍‍आह करब जरूरी छन्‍हि‍।
सावि‍त्री-             नौकरी करै छथि‍, तहूमे शि‍क्षक छथि‍। ई तँ दीब बात भेल। जाधरि‍ नोकरी करै छथि‍ ताधरि‍ तलब भेटतनि‍ आ छुटलाक (रि‍टायर) उत्तर पेन्‍शन। (मुस्‍की दैत) पाँच कर अन्न आ पाँच हाथ वस्‍त्रक दुख गीताकेँ नै हएत। गामक नाओं कहू?

पुलकि‍त-            धरमपुर।

सावि‍त्री-             गामो तँ दुसैबला नहि‍ये अछि‍। लगो अछि‍। जाबे जीब ताबे आवा-जाही रहबे करत। (पति‍सँ) एक-दूटा बात वि‍चारणीय अछि‍।
चि‍न्‍तामणि‍-           (व्‍यग्र) से की, से की?

सावि‍त्री-             जहाँ धरि‍ उमेरक बात अछि‍ ओहो परमपराक अनुकूले अछि‍। राजा दशरथ तीनटा बि‍‍आह केने रहथि‍। कि‍अए केने छलाह? अही दुआरे ने जे पहि‍ल कन्‍याँसँ सन्‍तान नै भेलनि‍। प्रश्न अछि‍ जे सन्‍तानक प्रतीक्षामे दस बर्ख समए लगले हेतनि‍?

चि‍न्‍तामणि‍-           कने सोझरा कऽ कहि‍यौ?

सावि‍त्री-             सन्‍तान नै हेबाक घोषणा (ि‍नर्णए) दस बर्ख पछाति‍ये ने होइत छै। तै बीच तँ ओकर प्रति‍कार होइ छै। जोग-टोनसँ लऽ कऽ दवाइ-वि‍ड़ोमे दस बर्ख लगि‍ये जाइत अछि‍।
चि‍न्‍तामणि‍-           हँ, से तँ होइते अछि‍।
सावि‍त्री-             पहि‍लसँ तेसर पत्नीक बीच पनरह-बीस बर्ख लगि‍ये जाइत अछि‍। ऐ हि‍सावसँ लड़का (बर) उपयुक्‍त छथि‍। दोसर प्रश्न अछि‍ दोसर पत्नीक।
चि‍न्‍तामणि‍-           हँ, से तँ अछि‍ये।
सावि‍त्री-             दोसर पत्नी तँ ओतऽ अधला होइत अछि‍ जतऽ सौतीन बनि‍ जि‍नगी चलैत। से तँ नहि‍ये अछि‍। रहल बच्‍चाक सतमाए होएब? सासुक लेल तँ पुतोहुए हएत।
चि‍न्‍तामणि‍-           (मुड़ी डोलबैत) हँ, से तँ अछि‍ये?

सावि‍त्री-             ई तँ नीके भेल।
चि‍न्‍तामणि‍-           केना?

सावि‍त्री-             (हँसैत) जहि‍ना गुरुसँ श्रेष्‍ठ सतगुरु होइत छथि‍ तहि‍ना।
चि‍न्‍तामणि‍-           नै बुझलौं?

सावि‍त्री-             माएसँ श्रेष्‍ठ सतमाए ऐ लेल श्रेष्‍ठ होइत जे माए अपन (कोखि‍क) सन्‍तानक सेवा करैत (पालैत-पोसैत) जहन की सतमाए दोसराकेँ। जँ आन बच्‍चाक सेवा अपन बच्‍चा सदृश कि‍यो करैत तँ वएह ने सतमाए भेली।
चि‍न्‍तामणि‍-           मुदा.....?

सावि‍त्री-             हँ। अपना समाजमे सतमाएकेँ सौति‍नि‍या डाहक प्रतीक बुझल जाइत अछि‍। ठाम-ठीम अछि‍यो। मुदा (सत-माए) सतमाए तँ ओ भेली जे अपने बच्‍चा जकाँ दोसरोक बच्‍चाकेँ बूझि‍ सेवा करए।
चि‍न्‍तामणि‍-           (ठहाका मारि‍) आगू बढ़ै छी।

(())


अंति‍म दृश्‍य-

                  (चि‍न्‍तामणि‍केँ पुलकि‍त स्‍कूलक अग्‍नेयमे ठाढ़ कऽ वि‍पति‍बाबू आ बुद्धिधारी बाबूकेँ बजा अनैत)
                  चारू गोटे बैसल।
बुद्धि‍धारी-            अपनेक नाओं?

चि‍न्‍तामणि‍-           लोक चि‍न्‍तामणि‍ कहैए।
बुद्धि‍धारी-            अपनेकेँ कन्‍या छथि‍?

चि‍न्‍तामणि‍-           हँ।
बुद्धि‍धारी-            (वि‍पति‍बाबूकेँ देखबैत) यएह बर (लड़का) छथि‍। सहयोगी छथि‍। हि‍नक पत्नी पछि‍ला साल मरि‍ गेलखि‍न। बृद्ध माए आ दूटा बच्‍चा छन्‍हि‍। आब अपन वि‍चार देल जाउ?

चि‍न्‍तामणि‍-           वि‍द्यालयक आंगनमे बैसल छी तँए कहै छी। ओना हम बड़ गरीब छी। उनैस-बीस बर्खक बेटी अछि‍। तीन सालसँ बि‍‍आहक बात मोनमे नाचि‍ रहल अछि‍ मुदा कतौ नाकपर माछी नै बैस रहल अछि‍।

बुद्धि‍धारी-            अपनेकेँ एक्को-पाइ खर्च नै हएत। वि‍पति‍बाबू कमाइ छथि‍। सब खर्च करताह।

चि‍न्‍तामणि‍-           केहेन बात बजै छी। ई कहू जे लाम-झामसँ बरि‍आती नै जाएत। मुदा अपना दरबज्‍जापर सँ बेटी जमाएकेँ पाँच हाथ नव वस्‍त्र पहि‍रा अरि‍आति‍ कऽ वि‍दा नै करब से केहेन हएत?

बुद्धि‍धारी-            जहन संबंध स्‍थापि‍त कए रहल छी तहन भेद कि‍अए?

चि‍न्‍तामणि‍-           जहि‍ना आमक गाछकेँ दोसर गाछक डारि‍मे बान्हि‍ कलम बनाओल जाइत अछि‍ तहि‍ना ने दू परि‍वार मि‍लि‍ बनैत अछि‍। मुदा दुनूक अपन-अपन गुण तँ रहि‍ते अछि‍।

बुद्धि‍धारी-            नै बुझलौं?

चि‍न्‍तामणि‍-           हमर कन्‍या मि‍थि‍लाक ललना छी। एक बेर जइ पुरुषसँ हाथ पकड़बैत अछि‍ जि‍नगी भरि‍ स्‍वामी, पति‍ आ गुरुभक्‍त बनि सेवा करैत अछि‍। कहि‍यो अपन सीमाक उल्‍लंघन नै करैत अछि‍। भलहि‍ं राम सन बेटाकेँ पि‍ता बनवास दऽ देलखि‍न मुदा कौशल्‍या बात कहाँ कटलकनि‍।

बुद्धि‍धारी-            से की?

चि‍न्‍तामणि‍-           यएह जे रामपर जते अधि‍कार पि‍ता दशरथक छलनि‍ तइसँ कम तँ माए कौशल्‍याक नै छलनि‍। मुदा कहाँ अपन अधि‍कारक प्रयोग केलनि‍। आँखि‍ मुनि‍ सुहकारि‍ लेलकनि‍।
बुद्धि‍धारी-            (नमहर साँस छोड़ैत) वि‍पति‍बाबूक परि‍वार अलग छन्‍हि‍। जेहने अपने छथि‍ तेहने माए छथि‍न। दुनू बच्‍चा तँ गाइयोक बच्‍चासँ कोमन आ सुशील अछि‍।
चि‍न्‍तामणि‍-           भाग्‍य हमरा बेटीक जे लगौल फुलवाड़ीक माली बनि‍ सेवा करत।
अंति‍म दृश्‍य, मि‍थि‍लाक बि‍याहक।
समाप्‍त।

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